राष्ट्रीय संत
सनातन धर्म के प्रखर वक्ता और समाज सुधारक
डॉ. चतुर नारायण पराशर जी महाराज का जीवन सेवा, साधना और समर्पण की एक अनूठी मिसाल है। जानिये उनके जीवन यात्रा और समाज के प्रति उनके योगदान के बारे में।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
विद्यार्थी जीवन
महाराज जी का जन्म एक धर्मपरायण ब्राह्मण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनमें आध्यात्म के प्रति गहरा रुझान था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह नगर में पूर्ण की और तत्पश्चात उच्च शिक्षा के लिए प्रस्थान किया।
संस्कृत और ज्योतिष
उन्होंने संस्कृत साहित्य और ज्योतिष शास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.) की डिग्री प्राप्त की। वेदों और उपनिषदों के गहन अध्ययन ने उन्हें सनातन धर्म की मूल भावना को समझने में सहायता की।
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
एक संस्कारी और धर्मनिष्ठ परिवार में जन्म।
उच्च शिक्षा
संस्कृत एवं ज्योतिष में परास्नातक (M.A.)।
दीक्षा
आध्यात्मिक गुरु से दीक्षा और सन्यास ग्रहण।
"मानव सेवा ही माधव सेवा है। जो दीन-दुखियों के आंसू पोंछता है, वही सच्चा ईश्वर भक्त है।"
— डॉ. चतुर नारायण पराशर
आध्यात्मिक यात्रा
सनातन धर्म के प्रचारक
डॉ. पराशर जी ने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया है। उनकी ओजस्वी वाणी और सरल व्याख्यान शैली श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। उन्होंने देश-विदेश में सैकड़ों कथाओं और प्रवचनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की अलख जगाई है।
- check_circleश्रीमद्भागवत कथा के मर्मज्ञ वक्ता
- check_circleयुवाओं को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
- check_circleधार्मिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का सन्देश
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संत सेवा एवं समाज कल्याण
डॉ. चतुर नारायण पराशर जी महाराज का जीवन केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है। वे समाज में व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन और मानवता की सेवा में निरंतर सक्रिय हैं। उनका मानना है कि संत सेवा ही परम धर्म है।
वनवासी कल्याण
आदिवासी और उपेक्षित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार केन्द्रों की स्थापना। वनवासियों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास।
गरीब और असहाय सेवा
निर्धन और निर्बल वर्ग के लिए भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सहायता। मानवीय सेवा में निरंतर योगदान।
सामाजिक सुधार
दहेज, नशा और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों के उन्मूलन हेतु जागरूकता अभियान। युवा पीढ़ी को संस्कार और धर्म से जोड़ना।